सोमवार, 27 जुलाई 2009

"समीर लाल उड़नतश्तरी वाले" : आख़िर इस नाम का राज क्या है

सबसे पहले तो गुस्ताखी माफ़! पर जब से मैंने 'समीर लाल उड़न तश्तरी वाले' का नाम ब्लॉगवाणी पर देखा तभी से मेरे पेट में दर्द शुरू हो गया. वैसे तो मैंने भी बाबा समीरानंद को इस नए नाम की बधाई आनन-फानन में दे डाली ताकि कोई और पहले से इसका कॉपीराइट लेने के बारे में विचार शुरू न कर सके. पर अब तक नहीं समझ पाया कि आखिर इस नाम की जरूरत क्यों पड़ी - 'समीर लाल उड़न तश्तरी वाले'!

अब सारी ब्लॉग दुनिया जानती है की उड़नतश्तरी सिर्फ और सिर्फ उन्हीं की है और कोई भी इसमें उड़ने की जुर्रत करने की सोच भी नहीं सकता है ऐसे में इस नाम की जरूरत क्यों पड़ी? अब कोई दो-चार उड़नतश्तरी हो तो शायद सोचें कि कुछ ख़ास पहचान के लिए यह किया जाय. जैसे दिल्ली में मिठाई की दुकानों पर लिखा होता है. अग्रवाल स्वीट्स 'करांची वाले' या अग्रवाल स्वीट्स 'देशी घी वाले' या चांदनी चौक के पराँठे वाली गली में अपनी पहचान के लिए लिखा होता है पराँठे वाली दुकान 'असली वाले' .... आदि-आदि. पर यह समस्या कम से कम अपने बाबा समीरानंद को तो नहीं हो सकती है।

न ही बाबा को यह समस्या है कि ब्लॉग पर उनके हमनाम कई पैदा हो गए हों और उनसे प्रतियोगिता का कोई खतरा हो गया हो. वैसे कुछ समीर को मैं जानता हूँ पर निश्चिंत हूँ कि उनके पास ब्लॉग लिखने के बारे में हम निठल्लों की तरह सोचने का भी वक्त नहीं है. जैसे दुनिया के सबसे बड़े अखबार के मालिक भी समीर साहेब ही हैं. पर ब्लॉग लेखन (ख़ास कर हिंदी से) उनका दूर-दूर तक वास्ता नहीं है. तो यह खतरा बाबा समीरानद को कतई नहीं है. एक समीर हमारे पुराने बॉस हुआ करते थे, बड़े प्यारे से. पार्टियाँ देने में उनकी कोई सानी नहीं थी और घूमने के भी गजब शौकीन थे. बाद में वे देश के एक बेहद मशहूर टीवी चैनल में बॉस बनकर चले गए.

एक समीर काग्डी नाम का मेरा मित्र बना, जब मैं नेशनल डिफेन्स अकादेमी में चयनित होकर उसके साक्षात्कार के लिए बंगलोर गया था. चार दिन की दोस्ती वह परवान चढी की सेलेक्शन होने बाद भी काफी दिनों तक पत्र लिखता रहा जब तक की नेवी में वह पायलट नहीं बन गया और मैंने उसे चिठ्ठी के जबाव में लिखा था की पत्रकारों से मित्रता कहीं तुम्हारे करियर में दिक्कत तो नहीं देगी? उसके बाद तो वह महानुभाव गधे की सींग की तरह गायब हो गए.

एक समीर और मेरा मित्र बना. समीर महेन्द्रू नामक यह मित्र तब आया जब मैं पीटीआई में काम कर रहा था और वह भी साथ ही था. बाद में वह Dow jones में चला गया और मेरा संपर्क टूट गया. और, एक समीर साहेब हमारे पडोसी हैं. ऐसे की उनके दरवाजे और मेरे दरवाजे को संभालने वाला खम्बा भी फ्लैट में एक ही है. पर इन साहब से पिछले चार साल में चार बार से ज्यादा बात नहीं हुई है. पेशे से आईटी पेशेवर हैं और लिखने-पढने के धंधे को निचले तबके का काम मानते हैं. गनीमत यह है कि एक अखबार लेते हैं और उसे कभी-कभी पढ़ते भी हैं.

पर जहाँ तक मेरी समझ है तो इन चारों-पाँचों समीर से इन्हें तो कतई खतरा नहीं है. फिर यह 'समीर लाल उड़नतश्तरी वाले' जैसा खोजपूर्ण नाम क्यों? अगर पाठकगण मेरी मदद कर सकते हैं तो जरूर सुझाव दें क्योंकि मैं उम्र के इस पड़ाव पर दिल्ली में दूसरा चांदनी चौक नहीं बनवाना चाहता हूँ (अपने सर पर).... पर यह न कहियेगा कि नाम में क्या रखा है?

17 टिप्‍पणियां:

  1. नाम में बड़ा दम है भाई. यदि यकीन न हो तो आकर घूमना हमारे ब्लॉग पर और पढना "नाम तेरे कितने नाम"

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  2. समीर का अर्थ हवा है..और उड़नतश्तरी का सम्बन्ध हवा से है तो हो सकता है जनाब ने यहीं से अपने नाम को निकाला हो 'समीर के लाल'= उड़नतश्तरी

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  3. >उनके पास ब्लॉग लिखने के बारे में हम निठल्लों की तरह सोचने का भी वक्त नहीं है...
    अच्छा तो हम निठल्ले दिखाई देते हैं:)

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  4. भाई साहब,
    आपको टाइम लग जाएगा ये सब समझने में और तब तक आपके इस ब्लाग का नाम भी बदल कर हो जाएगा “वृद्ध” ! हा हा। अरे हटाइए भी, और “लाल” को हमारे लिए छोड़ दीजिए। ओ.के.

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  5. लाल को बवाल के लिये ही छोड़ दो भाई!

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  6. भाई मेरे

    उड़न तश्तरी को तो यूँ भी कोई खतरा नहीं वरना हम लिखते 'उड़न तश्तरी समीर लाल वाली' और उड़न तश्तरी के उड़ते उड़ते यह हालात हो लिए हैं कि लोग हमें पत्र में 'उड़न जी' या 'तश्तरी जी' या 'उड़न तश्तरी जी' तक लिखने लगे हैं.

    समीर लाल को कौन पहचान रहा है. अब अगर कहीं समीर लाल लिख दें और वो समझ ही न पाये कि ये बंदा कौन है तो अपने ब्रेन्ड नेम को चिपकाये घूम रहे हैं- 'समीर लाल उड़न तश्तरी वाले'

    आशा है आपकी उन्कुंठा कुछ हद तक शांत हो गई होगी. :)

    एक समीर तो और हैं ही हिन्दी ब्लॉग वाले. कभी कभी टिप्पणी करते दिख जाते हैं और आजकल फिल्म वालों को भी ब्लॉग लिखने का शौक आ गया है तो कल को वो समीर 'गीत लिखने वाले' आ लेंगे तो भी हम बचे रहेंगे ऐसे ही: 'समीर लाल उड़न तश्तरी वाले' :)

    शुभकामनाऐं.

    वैसे जिज्ञासु बहुत हो!! :)

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  7. पूछना पड़ेगा कि समीर लाल उड़नतश्तरी (ब्लॉग) वाले का नाम क्या है :-)

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  8. बड़े भाई,

    अब जिज्ञासा के बगैर काम नहीं चलता है. कुछ आदत भी है और कुछ पेशागत बुराइयों ने इसे बढ़ा दिया है. पर जिज्ञासा शांत करने का शुक्रिया. साथ ही इतनी लम्बी टिप्पणी के लिए आपने वक्त निकाला इसके लिए अलग से शुक्रिया.

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  9. चलो आपकी पोस्ट के बहाने हमारी भी जिज्ञाषा शांत हो गयी |

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  10. "समीर लाल उड़नतश्तरी वाले"
    हूँ.... अच्छा प्रश्न है आपका और विषय भी अच्छा है....क्योंकि इससे इतना ज़रूर साबित होता है की हम ब्लागर्स और कुछ हों या न हों निठल्ले जरूर हैं . ..फिर भी इनके नाम की विवेचना आज कर ही लें....वैसे समीर जी ने स्वयं जवाब दिया हैं लेकिन क्या है न बड़े लोग कहते कुछ है, होता कुछ है.....तो मुझे लगता है कि इसका असली अर्थ ये हो सकता है...
    ये वो तस्तरी हैं जिनका रंग लाल है और जो हवा में उड़ते हैं..... हाँ.....बिलकुल यही सोच के उन्होंने ये नाम रखा
    "समीर लाल उड़नतश्तरी वाले".......अब ये बात समीर जी थोड़े ही बताएँगे.......ही ही ही

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  11. naam vaam me kuchh nahin, naam vaam bakvaas
    satya naarayan naam k jhoothe mile pachaas
    ___ha ha ha ha

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  12. अरे!!!उडनतश्तरी वाले मतलब कोइ दुसरे ग्रह के तो नहिं समज़ रहेहो इन्हें ? ये तो अच्छे ख़ासे इंसान है। इन्हें :एलियन:तो नहिं समज़ रहे हो? ।सही कहा ना समीरभाइ!!

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  13. समीर जी से आप की मुलाकात है कि नही यदि होती तो ये सवाल ही खडा नही होता, क्यॊ कि संसार बिचित्रताओ से भरा हुआ है । और बिचित्र लोग दुनिया मे विरले ही होते है , और साहब इतनी खूबी के बाद तॊ आसमान मे भी रास्ता बना कर दिखा रहे है श्री समीर लाल जी मजे लो उडनतश्तरी की शैर करने मिले तो चूकना नही हमने तॊ ६ माह तक रोज घूमे जबलपुर मे ।

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  14. अब इस नाम का "राज़" तो आपने खोज लिया, और मै अब तक इतना समझ चुकी कि हिंदी ब्लॉग की दुनिया पर इस नाम का "राज" ज़रूर है ! वैसे आपने इस ब्लॉग में इस नुक्ते पर ध्यान नहीं दिया पर देखिये हिंदी में बिंदी और उर्दू (जो आजकल हिंदी में घुसपैठ कर रही है) में नुक्ता,बड़ी ही काम की चीज़ है !
    :)
    THANK YOU.

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  15. फ़िर सती जी ने शंका प्रकट की : महादेव मुझे समझाइये क्या ये वही समीर जी हैं जो उड़नतश्तरी लिये घूमते हैं . अगर वही हैं तो यह उड़न तश्तरी एक दिन के लिए मुझे दिलवा दें मैं अपने पिता दक्ष प्रजापति के घर यज्ञ में जाना चाहती हूँ ,

    महादेव बोले , " नहीं सती जी , आप पैदल जायें उड़नतश्तरी तो लाल के लिए ही है और लाल बवाल के लिए !

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  16. समीर जी के ब्लाग का यूआरएल कौन पूछेगा? इतने सारे समीर आपने गिना दिए। इसीलिए हमारे भाई ने उड़नतश्तरी का रूप लिया है।

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  17. समीरलाल जी के बारे में काफी जानकारी मिली आपके पोस्ट के दौरान और सभी ब्लोग्गेर्स के दौरान! कुछ अलग सा पोस्ट है!

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