गुरुवार, 9 जुलाई 2009

हमलों के बाद आर्थिक सेहत के लिए ऑस्ट्रेलिया छवि सुधार में

चंदन शर्मा

इन दिनों एक ऑस्ट्रेलिया का एक प्रतिनिधि मंडल भारत के दौरे पर आया हुआ है. शिक्षा से सम्बंधित यह प्रतिनिधि मंडल भारत में ऑस्ट्रेलिया की छवि सुधार करने में लगा हुआ है और उन्ही बातों को दुहरा रहा है जिसकी चर्चा हम इस मंच पर पहले भी कर चुके हैं (देखें: ऑस्ट्रेलिया में नहीं है रंगभेद और ऑस्ट्रेलिया से सम्बंधित अन्य लेख व खबरें). इस प्रतिनिधिमंडल ने कल मीडिया को कहा कि वहां भारतीयों पर हो रहे हमले रंगभेदी न होकर अवसरवादी और लूट-पाट की नीयत से किये गए हैं.
ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी कॉलिन वाल्टर्स के अनुसार ऑस्ट्रेलिया भारतीयों के लिए 'सुरक्षित' देश है और हमलों को रोकने के लिए कई कानूनी प्रावधान भी किये गए हैं. उनका यह भी तर्क है कि इस देश में एक लाख से ज्यादा भारतीय बसते हैं. वाल्टर्स साहब कि बात से चलिए सहमत भी हो लेते हैं पर सच्चाई यह है कि भारतीयों पर हमले रुक नहीं रहे हैं. मान भी लिया जाय कि यह सब लूट-पाट के लिए किया जा रहा है तो भी भारतीय छात्र ही इसके निशाने पर क्यों हैं. कहीं न कहीं रंगभेदी मानसिकता तो काम कर ही रही है. और, भारत जैसे देश में ऑस्ट्रेलिया को छवि सुधार कि जरूरत क्या है?
दरअसल सारा खेल यहाँ पैसों का है. ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा के बजट का एक बड़ा हिस्सा भारतीय छात्रों से आता है. आंकडों में देखें तो करीब ८००००० छात्र वहां पढ़ने के लिए जाते हैं जिनका सालाना खर्चा औसतन छः लाख से १२ लाख प्रतिवर्ष होता है. साथ ही उनसे वसूली जाने वाली फीस भी वहां के स्थानीय छात्रों से करीब चार गुनी होती है. यानी कि करीब ५००० से ६००० करोड़ की रकम भारतीय खुशी-खुशी ऑस्ट्रेलिया की झोली में शिक्षा के नाम पर डालते रहे हैं. जाहिर है कि हाल के हमलों से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले छात्रों की संख्या में कमी आयी है जो ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक सेहत के लिए नुकसानदेह है. सारी कवायद इसे संभालने के लिए ही है. फिर यह मौसम दाखिलों का मौसम है अगर इसमें चूकें तो पूरा साल ही खाली जाएगा. सारी छवि सुधार के पीछे का सत्य यही है - कम से कम फिलहाल.

9 टिप्‍पणियां:

  1. Ab chhavi sudhaar karega hee. paapee pet (paise) ka sawaal hai.

    Giridhar K

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  2. Ab chhavi to sudhaar karega hee. Aakhir paapi pet (paise) ka sawaal hai.

    Giridhar K

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  3. अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे...
    हम तो पाहिले ही कहें थे, इन कंगालों हो भीख लेने की आदत है, अरे जो अपने माँ-बाप के नहीं उ हमरे-आपके होंगे का....

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  4. सही निष्कर्ष एवं विश्लेषण.

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  5. युवा जी
    आप कबीरा पर आये अपना मत प्रगट किया आभारी हूँ |
    पर सन्दर्भ समझ नहीं पाने से वह टिप्पणी कम , टिपियाना ज्यादा लग रही है , अगर आप की टिप्पणी '' स्वाइन और समलैंगिकता '' वाले आलेख के सन्दर्भ थी तो उसे वहीँ देते तो वह ज्यादा आनंद दायक होती |

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  6. वैसे मेरा एक आलेख इस विषय पर यहाँ है अवलोकन का अनुरोध है" स्वाइन - फ्लू और समलैंगिकता [पुरूष] के बहाने से " ||

    वैसे उसमें कही घटना लगभग सत्य है , सदगुर शरण सिंह मेरे बड़े भाई [ सौतेले ] का नाम था ,जिनकी मृत्यु जब मैं पॉँच वर्ष का था हो गयी थी , और यह घटना या यों कहें , मिलाती जुलती घटना उसी के अस पास की थी ||
    वैसे पुनः आगमन का धन्यवाद

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  7. आपकी सुंदर पंक्तियाँ मुझे बहुत अच्छी लगी!
    बहुत बढ़िया और सठिक लिखा है आपने! मैंने भी इस विषय पर जो पहले कहा था ग़लत नहीं था और अब जाकर ये बात सामने आ रही है की ऑस्ट्रेलिया में भारतियों का पड़ने के लिए आना पूरी तरह से महफूज़ है!

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  8. बढ़िया लिखा है आपने...! वैसे इस विषय पर एक आलेख मेरा यहाँ है -
    http://suitur.blogspot.com/2009/06/blog-post.html

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