मंगलवार, 25 मई 2010

दिल्ली में ब्लोगर्स गोष्ठी


रविवार को दिल्ली में हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की एक विस्तृत बैठक संपन्न हुई । ज्ञात हो कि दिल्ली ब्‍लॉगर्स इससे पहले भी कई बैठकों का सफल आयोजन कर चुके हैं। आभासी दुनिया के जरिए एक दूसरे से जुडे़ , समाज के विभिन्न वर्गों और देश के विभिन्न्न क्षेत्रों के लेखक और पाठक एक दूसरे के साथ साझे मंच पर न सिर्फ़ लिखने पढने तक सीमित रहे बल्कि उन्होंने आभासी रिश्तों के आभासी बने रहने के मिथकों को तोडते हुए आपस में एक दूसरे के साथ बैठ कर बहुत से मुद्दों पर विचार विमर्श किया । सुदूर छत्तीसगढ से आए साहित्यकार ब्‍लॉगर श्री ललित शर्मा जी और विख्यात ज्योतिष लेखिका श्रीमती संगीता पुरी जी के स्वागत और मिलन को एक सुनहरे मौके के रूप में लेते हुए आयोजित किए इस बैठक में लगभग ४० से भी अधिक ब्‍लॉगरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई । इस बैठक में शामिल होने वाले ब्‍लॉगर साथी थे- ललित शर्मा, संगीता पुरी, अविनाश वाचस्पति, रतन सिंह शेखावत, अजय कुमार झा, खुशदीप सहगल, इरफ़ान, एम वर्मा, राजीव तनेजा एवं संजू तनेजा, विनोद कुमार पांडे, पवन चंदन जी, मयंक सक्सेना, नीरज जाट, अमित (अंतर सोहिल)’ प्रतिभा कुशवाहा जी, एस त्रिपाठी, आशुतोष मेहता, शाहनवाज़ सिद्दकी, जय कुमार झा, सुधीर, राहुल राय, डा. वेद व्यथित, राजीव रंजन प्रसाद, अजय यादव,अभिषेक सागर, डा. प्रवीण चोपडा, प्रवीण शुक्ल प्रार्थी, योगेश गुलाटी, उमा शंकर मिश्रा, सुलभ जायसवाल, चंडीदत्त शुक्ला, श्री राम बाबू, देवेंद्र गर्ग जी, घनश्याम बाग्ला, नवाब मियां, बागी चाचा इत्‍यादि रहे।

इस बैठक में औपचारिक परिचय (आभासी दुनिया के लोगों का आमने सामने एक दूसरे से रुबरू होना एक दिलचस्प अनुभव होता है) के बाद , हिन्‍दी ब्‍लॉगरों के बीच सम्‍मानीय चर्चित हिन्‍दी ब्‍लॉगर और बैठक के आयोजक अविनाश वाचस्पति (जो कि सामूहिक ब्‍लॉग नुक्‍कड़ के मॉडरेटर हैं) ने प्रस्तावना में कई प्रमुख बातों को सबके सामने रखा, जिसमें उन्‍होंने कहा कि ''हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग को उन दोषों से दूर रखने का प्रयास करेंगे जो टी वी, प्रिंट मीडिया और अन्‍य माध्‍यमों में दिखलाई दे रहे हैं। द्विअर्थी संवाद और शीर्षकों के जरिए सनसनी फैलाने से बचे रहेंगे। जो भाषा हम अपने लिए, अपने बच्‍चों के लिए चाहते हैं - वही ब्‍लॉग पर लिखेंगे और वही प्रयोग करेंगे। ब्‍लॉगिंग को पारिवारिक और सामाजिक बनायेंगे, जिससे भविष्‍य में इसे प्राइमरी शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके। ब्‍लॉगिंग में वो आनंद आना चाहिए जो संयुक्‍त परिवार में आता है। यहां पर उसकी अच्‍छाईयां ही हों उसकी बुराईयों से बचे रहें। हम सबका प्रयास होना चाहिए कि जिस प्रकार आज मोबाइल फोन का प्रसार हुआ है उतना ही प्रचार प्रसार हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग का भी हो परंतु उसके लिए हमें संगठित होना होगा। इसके लिए हमें एक वैश्विक संगठन बना लेना चाहिए।

उपस्थित ब्‍लॉगरों ने इन मुद्दों के अलावा और भी ज्‍वलंत विषयों ब्‍लॉगिंग और हिंदी , पत्रकारिता को कड़ी चुनौती देती ब्‍लॉगिंग विधा, ब्‍लॉगिंग एक सामाजिक समरसता कायम करने के माध्‍यम के सशक्‍त रूप में, पर भी सबने गहन चिंतंन किया । ब्‍लॉगरों के एक संगठन की आवश्यकता पर सबने सहमति जताते हुए इस कार्य को आगे बढाने का कार्य शुरू कर दिया है। ब्‍लॉगिंग की बढ़ती हुई ताकत के कारण भविष्य में ब्‍लॉगिंग और हिन्‍दी ब्‍लॉगरों को दमन का सामना न करना पड़े और उनकी अभिव्‍यक्ति पर सेंसर न लगे, इसके लिए भी आज एक बड़ी आवश्‍यकता है इस तरह के संगठन के निर्माण की है जिससे हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग जगत स्‍वयं ही अनुशासित हो सके और इस प्रकार की संभावना ही पैदा न हो। इसी संकल्प के साथ बैठक का समापन हुआ । भविष्य में नियमित रूप से न सिर्फ़ ऐसी बैठकों अपितु तकनीकी कार्यशालाओं, विकीपीडिया को समृद्ध करने के लिए योगदान करते हेतु, साहित्यिक विधाओं के विशाल कोशों में सक्रिय भागीदारी के लिए युवाओं को तैयार करने के लिए आयोजनों के प्रस्‍ताव का सभी ने करतल ध्‍वनि से स्‍वागत किया।

10 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा प्रस्तुती / आप लोग अपना अपने बारे में जानने वाला प्रोफाइल सार्वजनिक करें तो बेहतर रहेगा /

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  2. hum honge kaamyaab,

    eeeeeeeekkkkkkkkkkkkkkkk

    DDDDDIIIIIIIIIIIIINNNNNNNNNNNNNN

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  3. बेहतरीन प्रस्तुति. बहुत खूब!

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  4. मेरी तरफ से एक पसंद का चटका भी.

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  5. अच्छा लगा आपकी कलम से ब्यौरा पा कर.

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  6. वाकई आभासी दुनिया के लोगों से मिलना एक अनूठा अनुभव होता है।

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  7. हा...हा...हा....हा....हू....हू.....हू.....हू.....हे.....हे.....हे.....हो....हो.....हो....गनीमत है कि किसी ने हमें वहां देखा नहीं....हम भी वहीँ रोशनदान में बैठे सबको टुकुर-टुकुर निहार रहे थे....अगर गलती से भी वहां सबके बीच टपक पड़ते तो सारे कार्यक्रम की वाट ही लग जाती....खैर मुबारक हो सबको यह सम्मलेन.....!!!

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