गुरुवार, 16 जुलाई 2009

कॉलेज में मेरा पहला दिन, जब हंसी फूट पड़ी

दिल्ली विश्वविद्यालय में आज से नया सत्र शुरू हो गया. दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉलेज के छात्रों के लिए पहला दिन नए अनुभव वाला होता है. हमारी एक पाठिका ने अपना अनुभव 'yuva' के साथ बांटा है. उसका नाम और उसके साथियों का नाम इस पाठिका के अनुरोध पर बदल दिया गया है. पर अनुभव को ज्यों का त्यों पाठकों के लिए पेश किया जा रहा है :

आज मेरे कॉलेज का पहला दिन था. जैसा हमें परिचय कक्षा के दौरान १५ जुलाई को बताया गया था उस हिसाब से मैं दिल्ली विश्विद्यालय के साउथ कैम्पस में स्थित ARSD कॉलेज सबेरे ८.३० बजे पहुंच गयी. हमें कहा गया था विज्ञान की कक्षाएं सबेरे ८.३० से ही लगेंगी.
खैर, कॉलेज पहुँचने पर पता चला कि कक्षा की बात तो दूर यहाँ बैठना कहाँ है यह भी हम लोगों के लिए तय नहीं हो पाया था. अब ऐसे में मेरी स्कूल की सहेली नमिता जिसने रसायन शास्त्र में प्रवेश लिया था उसके साथ कॉलेज में अपनी कक्षा तलाशने निकल पड़ी. पता चला कि ऊपर के कमरे में कक्षा लगने वाली है. मैं भी उस कमरे में अन्य छात्रों के साथ बैठ गयी. उस थियेटरनुमा कमरे में बैठने के कुछ देर के बाद ही चार शिक्षकनुमा युवकों ने प्रवेश किया. यह बताया गया कि हमारा ओरिएन्तशन क्लास होने वाला है. हम लोगों से परिचय पूछा जाने लगा. हमारी होउबी के बारे में पूछा गया. जब मेरी सहेली की बारी आयी तो उसने कहा कि पुस्तकें पढना उसकी रूचि का काम है. इस पर उन युवकों के मुंह से निकला 'अरे, ये लडकियां किताब इतना क्यों पढ़ती हैं' . तब कही जाकर हमें समझ में आया कि हम उल्लू बनाए जा रहे है और ये शिक्षक नहीं हमारे सीनियर हैं. हमलोग फिर वहां से निकलने कि जुगत में लग गए.

पर एक बार फंसने के बाद निकलना आसान नहीं था. जो भी जाने के लिए उठ रहा था उसे गाना सुनाना पड़ रहा था. मेरी भी बारी आयी तो मेरे मुंह से निकल गया कि हम लोगों ने इतना सुना दिया है कुछ आप लोग भी सुनाएँ. इस पर वो थोडा घबराएं. पर कहा कि पहले मैं सुनाऊं फिर वे गायेंगे. मैंने गाना गाया - 'चंदा रे मेरे भैया से कहना बहना याद करे ...' इतना सुनना था कि उन चारों ने गाना शुरू किया - ' बहना ओ बहना तेरी डोली मैं सजाऊंगा ...' और गाते-गाते भाग खड़े हुए. फिर तो हम लोगों कि जो हंसी छूटी कि पूछिए मत. यहाँ तक कि अभी भी याद कर के हंस रही हूँ. कॉलेज का पहला दिन इतना मजेदार होगा मैंने तो सोचा नहीं था.

11 टिप्‍पणियां:

  1. हा...हा...हा मज़ेदार तजुर्बा रहा आपका

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  2. वाह बहुत ही बढ़िया और मज़ेदार लगा कॉलेज का पहला दिन! मुझे भी कॉलेज का वो पहला दिन याद आ गया पर इतना मज़ा नहीं हुआ था क्यूंकि मैं नई जगह पर थोडी घबरायी हुई थी! पर दूसरे दिन से सब के साथ बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी और कॉलेज जाने का मज़ा ही कुछ और था!

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  3. और पढ़ते-पढ़ते मेरी भी हंसी फूट पडी. ही-ही-ही--- मजेदार.

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  4. आपका लेख पढ़ कर मुझे अपनी पहली रैगिंग याद आ गयी, मुझसे भी गाना गाने को कहा गया, मैंने तपाक से कहा मुझे सिर्फ राष्ट्रीय गीत ही आता है, सीनियर्स ने कहा तो गाओ, मैंने कहा आप सब लोग सीधे खड़े हो जाओ, अब उनकी बारी थी रैगिंग होने की....
    आज भी याद करके मुस्कुराने लगती हूँ, बाद में हम सभी बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे...
    आपका धन्यवाद हमें भी अपने बीते दिन याद दिलाने ले लिए..
    बहुत अच्छा लगा..
    मजेदार...

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  5. कालेज का पहला दिन होता ही मजेदार है बस मज़ेदार नज़रिया होना चाहिये

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  6. mera bhi pahla din majedar tha.

    Wishing "Happy Icecream Day"...See my new Post on "Icecrem Day" at "Pakhi ki duniya"

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  7. कॉलेज की मीठी यादों को ताज़ा करा दिया आपने...
    शुक्रिया...
    www.nayikalm.blogspot.com

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  8. her ek ka acha he hota ha first day mera bhe acha rha!!!!!!!!!!

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